राजनीति

भगवंत सरकार के एक महीने में क्रांति की जगह भ्रांति में बदलती दिखी पंजाब में आप की जीत

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को एक माह हो चुका है। चाहे किसी सरकार की उपलब्धियां जांचने के लिए यह पर्याप्त समय अवधि नहीं है परन्तु एक महीना पूरा होने पर जहां मुख्यमन्त्री भगवन्त मान ने अपनी पीठ थपथपाई है तो उनकी इतनी समय सीमा के कार्यकाल का मूल्यांकन करना जरूरी हो जाता है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने पंजाब में अपनी पार्टी की जीत को क्रान्ति बताया था परन्तु यह क्रान्ति बड़ी तेजी से भ्रान्ति में बदलती दिख रही है। एक माह में ही सरकार कानून व्यवस्था, बाहर के लोगों से संचालित होने आदि विषयों पर चर्चा में आ चुकी है।

आजकल भगवन्त मान टीवी चैनलों पर यह दावा करते नहीं थकते कि उनकी सरकार ने सत्ता सम्भालते ही राज्य में भ्रष्टाचार खत्म कर दिया। वे दावा करते हैं कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए हैल्पलाइन नम्बर जारी किया है और इतना करके ही उन्होंने मान लिया है कि राज्य में भ्रष्टाचार दम तोड़ चुका है। जहां तक हैल्पलाइन नम्बर की बात है तो यह पंजाब सहित अन्य सभी राज्यों में जारी किए जा चुके हैं। पंजाब में विजिलेंस विभाग का इस तरह का नम्बर पहले से ही चल रहा है। मुख्यमन्त्री को इस तरह का दावा करने से पहले लोगों को तथ्यात्मक जानकारी देनी चाहिए कि क्या राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर कोई सरकारी या गैर-सरकारी सर्वेक्षण हुआ है? क्या यह सरकारी रिपोर्ट है? दावे का आधार क्या है? अगर ऐसा नहीं है तो उनके दावे को केवल कॉमेडी का नया वीडियो ही माना जा सकता है, जिसमें वो विशेषज्ञ हैं।

भगवन्त मान ने अपनी सरकार की एक महीने की उपलब्धियों में निजी स्कूलों को फीसें न बढ़ाने, गैंगस्टरों के खिलाफ सख्ती बरतने, गेहूं की फसल पूरी तरह खरीदने के निर्देश सहित वह छोटे-छोटे प्रशासनिक काम गिनाए हैं जो जिला स्तर के अधिकारी भी करते आए हैं। हां विधायकों की पेंशन घटा कर एक करना, नेताओं की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मचारियों की वापसी जैसे कदम अवश्य ही सराहनीय है परन्तु राज्य की आर्थिक स्थिति इससे ठीक नहीं होने वाली। राज्य के आर्थिक हालातों को कीमोथैरेपी की आवश्यकता है परन्तु मुख्यमन्त्री आईसीयू में पड़ी पंजाब की अर्थव्यवस्था का झाड़फूंक से उपचार करते दिखाई दे रहे हैं।

 

राज्य के आर्थिक हालातों का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार के अस्तित्व में आते ही मुख्यमन्त्री को सरकार का खर्चा चलाने के लिए प्रधानमन्त्री से एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज मांगना पड़ा। किसी राज्य के लिए पैकेज कोई नई बात नहीं है और केन्द्र सरकार समय-समय पर हर प्रान्त को यह सहायता उपलब्ध करवाती भी आई है परन्तु मुफ्तखोरी को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक पैकेज मांगने का कारनामा केवल भगवन्त मान जैसे नेता ही कर सकते हैं।

 

पंजाब सरकार ने सत्ता सम्भालते ही 25000 नई भर्तियां करने व 35000 अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा तो कर दी परन्तु अभी तक न तो नई भर्तियों के लिए विज्ञापन निकाला गया है और कर्मचारी को नियमित करने की बजाय उनके अनियमित कर्मचारी के रूप में कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। जहां तक कानून व्यवस्था का सवाल है तो राज्य में एक महीने में गैंगस्टरों की सक्रियता में अचानक तेजी आई है और कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी इसकी भेंट चढ़ चुके हैं।

 

अपनी सरकार के एक महीने पूरे होने की खुशी में मुख्यमन्त्री ने अपना चुनावी वायदा पूरा करते हुए जुलाई से हर घर को तीन सौ यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। सरकार के अनुसार ही इससे पंजाब ऊर्जा निगम पर चार हजार करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा। कोयले की कमी और धनाभाव के कारण निगम पहले ही चरमराने की हालत में है और अब सरकार की घोषणा से उसकी हालत और भी पतली होने वाली है। यह प्यासे के गंगादान जैसी नादानी नहीं तो और क्या है ? पंजाब जैसे सम्पन्न राज्य में जब लोग पहले से आसानी से बिजली बिलों का भुगतान कर रहे हैं तो लोगों में मुफ्तखोरी की आदत डालना कितना देशहित में है ? ज्ञात रहे कि इसी मुफ्तखोरी की राजनीति के चलते हमारा पड़ौसी देश जो कुछ सालों पहले सम्पन्नता की दौड़ में अन्य देशों से स्पर्धा कर रहा था, वह आज दिवालिया होने की कगार पर है। वहां अपने चुनावी वायदे को पूरा करते हुए राष्ट्रपति ने करों में कटौती कर दी और सरकार चलाने के लिए चीन से कर्जा लिया जाने लगा। हालात यह है कि वहां के लोगों को दाल-भात के लिए भी सड़कों पर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

 

राज्य सरकार के पहले विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान आम आदमी पार्टी की सरकार पूरी तरह दिशाहीन नजर आई। क्रान्तिकारी सरकार में दिशा और नीति का पूरी तरह अभाव दिखा। सरकार जनता को आश्वस्त नहीं कर पाई कि वो राज्य के विकास के लिए किस मार्ग का अनुसरण करने जा रही है, उसकी योजना क्या है, विकास की परिकल्पना क्या है ? पहले ही सत्र में तीन चौथाई बहुमत वाली सरकार में योग्य नेतृत्व का अभाव झलकने लगा।

 

अभी हाल ही में पंजाब के सचिव स्तर के अधिकारियों की दिल्ली के मुख्यमन्त्री के साथ हुई बैठक ने नया चांद चढ़ा दिया है। कितने आश्चर्य की बात है कि पंजाब के अधिकारियों की बैठक पंजाब सरकार के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति में दूसरे राज्य का मुख्यमन्त्री ले रहे हैं। इस घटना ने सात साल पहले डॉ. मनमोहन सिंह की याद को ताजा करवा दिया, जिन पर आरोप लगते थे कि वे कठपुतली सरकार चला रहे हैं। अब पंजाब में लगने लगा है कि भगवन्त मान दिल्ली वालों की ‘खड़ाऊं सरकार’ चला रहे हैं।

 

देश की राजनीतिक में आई विसंगति का एक कारण यह भी रहा है कि राजनीतिक दल अपनी राजनीति चलाने के लिए सरकार की दिशा बनाते हैं जबकि यह काम देश व देश की जनता की अपेक्षाओं व जरूरतों को ध्यान में रख कर किया जाना चाहिए। पंजाब सरकार के लोकलुभावन फैसलों को चेहरा बना कर केजरीवाल देश की राजनीति में अपना विस्तार चाहते हैं, परन्तु देर-सवेर इसका खामियाजा पंजाब की जनता को भुगतना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी अगर क्रान्ति की बात करती है तो उसकी सरकारों को वैसे काम भी करे, अन्यथा क्रान्ति की भ्रान्ति न फैलाए।

 

– राकेश सैन

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