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पेट्रोल-डीजल पर हुई एक्साइज ड्यूटी में कटौती की वजह से केन्द्र को हो रहा तगड़ा नुकसान, 7 राज्यों ने कमाया मुनाफा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती को लेकर एक बार फिर केन्द्र और गैर भाजपा राज्यों के बीच रार बढ़ सकती है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में इस बात को उठाया था कि केन्द्र के आग्रह के बाद भी कई राज्य सरकारों ने अपने हिस्से का वैट नहीं घटाया था। इस बयान पर राज्यों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया दी गई है। बता दें, पिछले साल नवंबर में केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल 10 पर रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी।

सरकारी के पास उपलब्ध आंकड़ों की जानकारी रखने वाले व्यक्ति ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की एक्साइज ड्यूटी में हुई कटौती की वजह से केन्द्र सरकार को हर महीने 8,700 रुपये का नुकसान हो रहा है। नवबंर 2021 से मार्च 2022 तक तेल की वैट में कटौती की है उनका कुल राजस्व 15,696 करोड़ रुपये था। जिसमें 11,398 करोड़ रुपये अकेले भाजपा शासित राज्यों ने छोड़े हैं।

पेट्रोल-डीजल पर फिर छिड़ा संग्राम! 

पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला टैक्स एक बार फिर राजनीतिक मुद्दा बन रहा है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद कांग्रेस की तरफ से इसका पलटवार किया गया है। कांग्रेस के अनुसार पिछ्ले आठ सालों में केन्द्र सरकार ने 26 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं। विश्व भर में अस्थिरताओं की वजह से कच्चे तेल और गैस की कीमतों में हाल के महीनों में उछाल देखने को मिला है।

7 राज्यों ने नहीं की थी कटौती

केन्द्र सरकार की तरफ से एक्साइज ड्यूटी में हुई कटौती के बाद भी सरकारी आंकड़ों पर नजर रखने वाले व्यक्ति के अनुसार 7 राज्यों ने अपने हिस्से का वैट नहीं घटाया था। इन राज्यों ने वैट के जरिए नंवबर से 11,945 करोड़ रुपये की कमाई की है।

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