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पिता की गांव में चप्पल की दुकान, मां करती हैं खेत में मजदूरी; भावुक कर देगी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के स्टार शूटर गजानन की कहानी

Gajanan Struggle Story: गजानन सहदेव खांडगले ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में 10 मीटर एयर राइफल में तीन पदक जीते। हालांकि, उनकी यहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं रही है। शूटिंग के उनके जुनून को पूरा करने के लिए परिवार को गांव में अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी है।

22 साल के निशानेबाज गजानन सहदेव खांडगले के लिए बुधवार यानी 28 अप्रैल 2022 को खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (केआईयूजी) में शानदार दिन रहा। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में पदकों का पूरा सेट (व्यक्तिगत में कांस्य, पुरुष टीम में रजत और मिश्रित टीम में स्वर्ण) जीता। तीन पदक जीतने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता को फोन किया और हाल ही में उनके बलिदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

पिछले साल, उनके माता-पिता ने अपने पास बची सारी जमीन बेच दी थी। उससे मिले धन का इस्तेमाल उन्होंने गजानन को राइफल खरीदने के लिए किया। गजानन ने बताया कि जमीन बंजर थी, लेकिन परिवार और उनके लिए यह भारी फैसला था। गजानन ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, ‘मेरे माता-पिता शूटिंग के मेरे जुनून को पूरा करने के लिए जमीन बेचने के लिए तैयार हो गए।’

गजानन ने बताया, ‘मैं 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन इवेंट में हिस्सा लेता था, लेकिन 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में चला गया, क्योंकि छर्रे सस्ते थे। शूटर बनना आसान नहीं है। खासकर मेरे जैसे इंसान के लिए जिसके पास बड़ा बैंक बैलेंस नहीं है। मेरे पिता सहदेव गांव में चप्पल की दुकान चलाते हैं। मेरी मां सोमित्रा दूसरे लोगों के खेतों में काम करती हैं। आज मैं अपने माता-पिता के बलिदान के कारण ही गले में इन पदकों के साथ पोडियम पर खड़ा हूं।’

गजानन महाराष्ट्र के बीड जिले स्थित तलवाड़ा गांव के रहने वाले हैं। उनके गांव के पास कोई शूटिंग रेंज नहीं है, लेकिन गजानन मोबाइल गेम पबजी के दीवाने थे। ऑनलाइन गेम खेलने के लिए आवश्यक कौशल और पेशेवर शूटिंग के बीच कोई तुलना नहीं है। हालांकि, गजानन का कहना है कि जब उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के लिए आयोजित किए जाने वाले शूटिंग शिविर के बारे में सुना तो उनके कान खड़े हो गए।

गजानन ने खेल में अपनी शुरुआत के बारे में बताया, ‘जब मैंने शूटिंग कैंप के बारे में सुना तो मैं बहुत उत्साहित था। पबजी की वजह से मुझे शूटिंग का आइडिया पसंद आया। मैंने सोचा, सिर्फ पर्दे पर ही क्यों खेलते हैं। क्यों न असलियत में बंदूक पकड़ें और निशाना लगाएं। मैं पदक जीत सकता था।’ जब गजानन को शूटिंग किट की जरूरत पड़ी, तो उनके माता-पिता ने अपनी सारी बचत लगा दी। उन्होंने लगभग 40,000 रुपए उधार भी लिए। गजानन ने भी उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

गजानन ने 30वीं अखिल भारतीय जीवी मावलंकर शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में 400 में से 397 अंकों के साथ रिकॉर्ड बनाया। छह महीने बाद यानी इस अप्रैल 2022 में, वह 10 मीटर एयर राइफल नेशनल ट्रायल्स के क्वालिफिकेशन राउंड में 630.3 के स्कोर के साथ शीष पर रहे। सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाले गजानन का उद्देश्य भारतीय टीम में जगह बनाना और ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।गजानन ने कहा, ‘मेरा लक्ष्य ओलंपिक में जाना है। शूटिंग को आगे बढ़ाना आसान नहीं रहा, लेकिन मुझे पता है कि अगर मैं कड़ी मेहनत करता रहा तो मैं अपने सपनों को सच कर पाऊंगा। जब मैंने शूटिंग शुरू की थी तब मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह खेल कितना महंगा हो सकता है। महंगे उपकरण के अलावा, यात्रा, आहार और शारीरिक फिटनेस बनाए रखने की लागत बहुत अधिक थी। हालांकि, मैंने इसे अब तक मेंटेन किया है। मुझे पता है कि मैं खेल में और अधिक हासिल कर सकता हूं।’

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