राज्यहरियाणा

जिला विजिलेंस कमेटियां करेंगी एक करोड़ तक के घोटालों की जांच

घोटालों की जांच अतिरिक्त उपायुक्तों की अगुवाई वाली जिला स्तरीय विजिलेंस कमेटी करेगी

चंडीगढ़ :   हरियाणा में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने के लिए राज्य स्तरीय हाई पावर कमेटी और सभी छह मंडलों में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की स्वतंत्र इकाइयों के गठन के बाद अब जिला और उपमंडल स्तर पर विजिलेंस टीमों के गठन का काम शुरू हो गया है। एक करोड़ रुपये तक के घोटालों की जांच अतिरिक्त उपायुक्तों की अगुवाई वाली जिला स्तरीय विजिलेंस कमेटी करेगी, जबकि इससे बड़े भ्रष्टाचार की जांच मुख्य सचिव की अगुवाई वाली राज्य स्तरीय हाई पावर कमेटी को सौंपी जाएगी।

सभी जिला उपायुक्तों को दस दिन में अतिरिक्त उपायुक्तों की अगुवाई में जिला स्तरीय तथा उपमंडल अधिकारियों की अगुवाई में उपमंडल स्तरीय विजिलेंस टीमें बनाने का निर्देश दिया गया है। भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए मुख्य सचिव की अगुवाई में गठित प्रदेश स्तरीय हाई पावर कमेटी में राजस्व वित्तायुक्त, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक तथा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के निदेशक शामिल हैं।

इसी तरह मंडल स्तर पर मंडलायुक्त विजिलेंस टीमों की कमान संभाल रहे हैं। मंडल स्तर की टीम की तरह जिला विजिलेंस कमेटियां ग्रुप बी, सी और डी श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध मिली एक करोड़ रुपये तक की शिकायतों की जांच कर सकेंगी।

अतिरिक्त जिला उपायुक्तों की अध्यक्षता में गठित जिला विजिलेंस टीम और एसडीएम की अगुवाई में गठित उपमंडल विजिलेंस टीम को मजबूत करने का काम भी शुरू हो गया है। जिला स्तरीय विजिलेंस टीम में एडीसी के अलावा उपायुक्त द्वारा नियुक्त कार्यकारी अभियंता और अकाउंटेंट, विजिलेंस महानिदेशक द्वारा नियुक्त डीएसपी तथा संबंधित महकमे का एक अफसर सदस्य के रूप में शामिल होगा।

उपमंडल स्तरीय टीम में एसडीएम के साथ ही उपायुक्त द्वारा नियुक्त इंजीनियर और अकाउंटेंट तथा विभाग का एक अधिकारी शामिल किया जाएगा। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार जिला स्तरीय विजिलेंस कमेटियों को पखवाड़े में एक बार और उपमंडल स्तरीय टीमों को हर सप्ताह किसी एक विभाग में औचक निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है।

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