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क्या हरियाणा में भी समान नागरिक संहिता को लेकर कमेटी का होगा गठन? राज्य के गृह मंत्री अनिल विज ने दिया यह जवाब

अनिल विज ने साफ तौर पर कहा कि हरियाणा में हम समान नागरिक संहिता लाने पर विचार कर रहे हैं, इस पर अध्ययन भी जारी है।

देश में इस वक्त समान नागरिक संहिता की मांग लगातार उठ रही है। इसे हिंदू संगठनों की ओर से उठाया जा रहा है। इन सब के बीच भाजपा शासित राज्यों में इसको लेकर कमेटी गठित करने के बात भी सामने आ रही है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले इसको लेकर भाजपा ने बड़ा चुनावी ऐलान किया था। राज्य में मिली जीत के बाद भाजपा ने कमेटी भी गठित कर दी है। गुजरात चुनाव से पहले भाजपा की ओर से बड़ा दांव खेला गया और यूसीसी को लेकर कमेटी गठित कर दी गई। हिमाचल में भी यूसीसी को लेकर एक कमेटी गठित करने की बात कही गई है। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ऐलान कर दिया है कि मध्यप्रदेश में वह समान नागरिक संहिता को लेकर एक कमेटी बना रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि धीरे-धीरे भाजपा शासित राज्य अपने यहां समान नागरिक संहिता को लेकर कमेटी बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

हरियाणा में भी भाजपा की सरकार है। अब सवाल यह है कि क्या हरियाणा में भी समान नागरिक संहिता को लेकर कोई कमेटी बनने वाली है? इसी को लेकर हरियाणा के गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल विज से सवाल पूछा गया। अनिल विज ने साफ तौर पर कहा कि हरियाणा में हम समान नागरिक संहिता लाने पर विचार कर रहे हैं, इस पर अध्ययन भी जारी है। अपने बयान में अनिल विज ने कहा कि सरकार के लिए सभी नागरिक एक समान होते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए कोई धर्म, जाति, क्षेत्र महत्व नहीं रखता इसलिए यूनिफॉर्म सिविल कोड हो, इससे एक ही कानून सभी नागरिकों पर लागू होगा। हरियाणा में UCC लाने पर हम विचार कर रहे हैं, अध्ययन कर रहे हैं।

इससे पहले ही भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में साफ तौर पर कह दिया है कि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने को लेकर पूरी तरीके से प्रतिबद्ध है। गृह मंत्री ने कहा था कि न सिर्फ भाजपा ने, बल्कि संविधान सभा ने भी संसद और राज्यों को उचित समय आने पर यूसीसी लागू करने की सलाह दी थी, क्योंकि किसी भी धर्मनिरपेक्ष देश में कानून, धर्म के आधार पर नहीं होने चाहिए। यदि राष्ट्र और राज्य धर्मनिरपेक्ष हैं तो कानून धर्म पर आधारित कैसे हो सकते हैं? हर धर्म के व्यक्ति के लिए संसद या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित एक ही कानून होना चाहिए।

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