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कभी IB की कथित रिपोर्ट, कभी लिख कर दिया…Gujarat में क्यों फेल हो गये Kejriwal?

आम आदमी पार्टी ने सूरत नगर निगम चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीतने के बाद गुजरात पर ध्यान देना शुरू किया था। आम आदमी पार्टी की नजर गुजरात विधानसभा चुनावों पर इसलिए थी क्योंकि उसकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा पूरी करने में यह राज्य मददगार साबित हो सकता था।

गुजरात विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझान सामने आ चुके हैं और ऐसा लगता है कि मीडिया ने आम आदमी पार्टी को जिस तरह बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था उसकी हवा निकलती नजर आ रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव को त्रिकोणीय बनाने के लिए आम आदमी पार्टी ने कई रैलियां, रोड शो और जनसभाएं की थीं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद चुनाव प्रचार का नेतृत्व करते हुए गुजरात में कई दिन बिताए थे। यही नहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तो गुजरात में केजरीवाल से भी ज्यादा दिन बिताये थे। आम आदमी पार्टी ने गुजरात में सांसद राघव चड्ढा को प्रभारी बनाया था जिन्होंने उम्मीदवारों के चयन से लेकर बड़ी जनसभाओं के आयोजन तक में काफी अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह वहां सारा चुनावी प्रबंधन संभाल रहे थे। इसके अलावा, पंजाब की तो पूरी सरकार ही गुजरात में कैम्प किये हुए थी। पंजाब सरकार के मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक महीने भर गुजरात में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करते रहे थे। आम आदमी पार्टी का प्रचार देख मीडिया ने भी उसे काफी गंभीरता से लिया और उसे सत्ता के प्रमुख दावेदार के रूप में पेश किया लेकिन चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि गुजरात में मोदी के नाम पर सारा वोट पड़ा है।

हम आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी ने सूरत नगर निगम चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीतने के बाद गुजरात पर ध्यान देना शुरू किया था। आम आदमी पार्टी की नजर गुजरात विधानसभा चुनावों पर इसलिए थी क्योंकि उसकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा पूरी करने में यह राज्य मददगार साबित हो सकता था। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की महत्वाकांक्षा अब राष्ट्रीय स्तर की राजनीति करने की है इसलिए भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने के उद्देश्य से आम आदमी पार्टी ने गुजरात की सभी 182 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारा और आक्रामक प्रचार अभियान भी चलाया। चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने खुद को और अपने राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल को भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष एकमात्र चुनौती के रूप में पेश किया था।

आम आदमी पार्टी की नजर चुनाव परिणाम पर इसलिए भी थी क्योंकि कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीतकर वह देश में यह दावा कर सकती थी कि वही एकमात्र पार्टी है जो सफलतापूर्वक कांग्रेस और भाजपा को टक्कर दे सकती है। फिलहाल रुझानों के मुताबिक गुजरात विधानसभा में आम आदमी पार्टी का खाता तो खुलता नजर आ रहा है लेकिन यदि गुजरात में आम आदमी पार्टी को अच्छी जीत मिलती तो 2024 के लोकसभा चुनावों में मोदी के विजय रथ को रोकने में केजरीवाल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती।

गुजरात केजरीवाल की उम्मीदों को कितना बड़ा झटका लगा है इसे इसी बात से समझ सकते हैं कि वहां उन्होंने मीडिया को लिख कर भी दिया था कि गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। यही नहीं केजरीवाल ने यह भी दावा किया था कि आईबी की एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि आम आदमी पार्टी की गुजरात में सरकार बनने जा रही है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने कई आंतरिक सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए भी गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने का दावा किया था।

इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में हिंदुत्व कार्ड चलते हुए प्रधानमंत्री से यह भी अपील की थी कि नोटों पर लक्ष्मीजी और गणेशजी की तस्वीर प्रकाशित की जाये। केजरीवाल ने गुजरात में यह भी वादा किया था कि दिल्ली की तरह यहां के लोगों को भी मुफ्त में तीर्थयात्रा करवाएंगे। लेकिन गुजरात की जनता ने उनके वादों पर भरोसा नहीं किया और मुफ्त की राजनीति को नहीं स्वीकारा।

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