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हरियाणा उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही को रद्द किया

न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल ने कहा, इन नियमों के पीछे स्पष्ट उद्देश्य यह प्रतीत होता है किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी को चार साल की वैधानिक अवधि के बाद, अपने जीवन के आखिरी समय में शांति से रहने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही को रद्द कर दिया है और नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि कथित कदाचार के चार साल बीत जाने के बाद सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की अनुमति नहीं है। अदालत ने अपने सात दिसंबर के आदेश में कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए जो बीत गई सो बात गई नियमों का कुछ औचित्य प्रतीत होता है।

न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल ने कहा, इन नियमों के पीछे स्पष्ट उद्देश्य यह प्रतीत होता है किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी को चार साल की वैधानिक अवधि के बाद, अपने जीवन के आखिरी समय में शांति से रहने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए। हरियाणा सरकार ने यह उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही का आदेश दिया था कि उसने 1986-88 में करनाल में तैनात रहने के दौरान राजस्थान से एलएलबी की पढ़ाई की थी। इसने कहा था कि निरीक्षक एक ही समय में दो जगहों पर उपस्थित नहीं हो सकता।

सेवानिवृत्त निरीक्षक राजपाल के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल 30 जून, 2019 को सेवानिवृत्त हुए और यहां तक ​​कि एक वर्ष के लिए उनका सेवा विस्तार भी 30 जून, 2020 को समाप्त हो गया तथा उनके खिलाफ पांच अक्टूबर, 2021 को आरोप पत्र जारी किया गया। आदेश में कहा गया कि किसी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद ‘‘घटनाओं के संबंध में, जो विभागीय कार्यवाही शुरू होने से चार साल पहले हुई हो सकती हैं, उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। न्यायाधीश ने कहा कि नियम का स्पष्ट तात्पर्य सेवानिवृत्त कर्मचारी को शांति से जीने देना है।

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