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हरियाणा सरकार ने बढ़ाए गन्ने के दाम, 372 रुपये प्रति क्विंटल होगी अदायगी; सीएम की अपील-आंदोलन खत्म करें किसान

हरियाणा सरकार ने प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों को राहत देते हुए गन्ने की कीमतों में दस रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। प्रदेश में अभी तक 362 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ने की खरीद होती थी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को बढ़ी हुई कीमतों का ऐलान करते हुए कहा कि नई कीमतें इस सीजन में गन्ना मिलों के शुरू होने वाले दिन से लागू होंगी।

इससे पहले गन्ना रिव्यू कमेटी के अध्यक्ष एवं कृषि मंत्री जेपी दलाल आज सुबह अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे और उन्होंने मुख्यमंत्री को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी। कमेटी ने तीन बैठकों के बाद मंगलवार की शाम यह रिपोर्ट तैयार की थी।

अपनी रिपोर्ट में गन्ना रिव्यू कमेटी ने आठ रुपये प्रति क्विंटल की दर से दाम बढ़ाने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री ने इसमें दो रुपये जोडक़र गन्ने की नई कीमत 362 रुपये से बढ़ाकर 372 रुपये कर दी। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चीनी मिलों को अपग्रेड करने पर भी जोर दिया है। पिछले साल सहकारी चीनी मिलों की रिकवरी 9.71 थी जबकि निजी क्षेत्र की चीनी मिलों की रिकवरी दर 10.24 थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चीनी की रिकवरी बढ़ाने के लिए भी कई तरह से सुझाव दिए हैं। जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों का घाटा 5300 करोड़ था जिसे लगातार कम किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश की चीनी मिलों के बाहर धरना दे रहे किसानों को आहवान किया कि वह बिना किसी देरी के चीनी मिलों को खुलवाएं और गन्ने की पिराई फिर से शुरू की जाए।

‘कुछ लोग किसानों के नाम पर खुलेआम कर रहे हैं राजनीति, उन्हें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’

मुख्यमंत्री ने बीकेयू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग किसानों के नाम पर खुलेआम राजनीति कर रहे हैं और राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी हैं। ऐसे लोग किसानों की आड़ में अपना राजनीतिक एजेंडा लागू करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे प्रदेश में किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने हरियाणा में मौसम की चपेट में आई सरसों की फसल की पांच फरवरी से गिरदावरी शुरू करवाने का ऐलान करते हुए कहा कि प्रदेश भर में पांच फरवरी से सरसों की फसल की नियमित गिरदावरी होगी। इसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। गिरदावरी रिपोर्ट आने के बाद ही सरसों के फसल मुआवजे पर फैसला लिया जाएगा।

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