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उत्तराखंड में बड़ा प्रयोग, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए जल्द मददगार हो सकते हैं ड्रोन

अब प्रदेश में कोरोना के 87 एक्टिव केस हैं, वहीं मंलवार को 21252 लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी गई।

देहरादून. उत्तराखंड में किसी भी कुदरती आपदा आने या आपात स्थिति बनने के समय डेटा जुटाने, प्रोसेस करने और स्थिति पर निगरानी रखने जैसी ​चुनौतियां रहती हैं. अब इन तमाम मोर्चों के लिए ड्रोन तकनीक की मदद बड़े पैमाने पर ली जा सकती है. उत्तराखंड का ड्रोन एप्लीकेशन और रिसर्च केंद्र यानी DARC पहली बार अपनी तरह का एक अनूठा कंट्रोल रूम बना रहा है. DARC से जुड़े अधिकारियों की मानें तो यह ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन अगले दो से तीन महीनों के भीतर काम करना शुरू कर देगा.

DARC में प्रोजेक्ट सलाहकार शयान अली की मानें तो अगले दो से तीन महीनों के बाद आपदा संभावित क्षेत्रों में 3डी मैपिंग में भी इसकी मदद ली जा सकेगी. अली के हवाले से टीओआई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस तरह के कंट्रोल रूम की ज़रूरत तब महसूस हुई, जब पिछले साल चमोली आपदा के समय ड्रोन्स को लॉंच करने और डेटा को तेज़ी से प्रोसेस करने में चुनौतियां और समस्याएं पेश आई थीं. अली के मुताबिक तब डेटा को देहरादून भेजना पड़ा, जिसमें खासा समय ज़ाया हुआ.

अपनी तरह का देश में पहला स्टेशन होगा
चमोली जैसी स्थिति से भविष्य में निपटने के लिए ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन बेहद महत्वपूर्ण होगा. अली कहते हैं कि शुरू होते ही यह देश का पहला अनूठा स्टेशन बन जाएगा क्योंकि यह पूरी तरह एक वाहन पर होगा. इसे चलाया जा सकेगा और आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचकर सीधे इसकी मदद ली जा सकेगी. यही नहीं, 3डी मैपिंग के ज़रिये नुकसान के आंकलन और बचाव कार्यो में भी बड़ी मदद मिलेगी.

उत्तराखंड के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित सिन्हा ने इस प्रोजेक्ट को बहुत उपयोगी करार देकर कहा कि आरपीटीओ स्टेटस के साथ डीजीसीए गाइडलाइन के मुताबिक फ्लाइंग सर्टिफिकेट मिल जाने पर कम कीमतों पर DARC राज्य में इससे जुड़ी ट्रेनिंग भी दे सकेगा. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने हाल में आपदा प्रबंधन विभाग की मीटिंग लेकर उत्तराखंड के आपदा संभावित क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को बेहतर करने के भी निर्देश दिए थे.

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